हिंदू आतंकवाद का भ्रम किसने खडा किया, कैसे किया

गुड मॉर्निंग – सौरभ शाह

(मुंबई समाचार, सोमवार- २५ मार्च २०१९)

कान्ग्रेस ने भाजपा और भाजपा के समर्थक राष्ट्र प्रेमियों को बदनाम करने के लिए ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसी अन्य नीच टर्म कॉइन की थी जो अब साबित हो रहा है. पिछले सप्ताह समझौता ट्रेन ब्लास्ट केस में स्वामी असीमानंद निर्दोष साबित हुए. नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एन.आई.ए.) नामक केंद्रीय जॉंच एजेंसी आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए बनी है, ऐसा उस समय हमें लग रहा था जब सोनिया – मनमोहन सरकार ने ३० दिसंबर २००८ को नेशनल ‘इनवेस्टिगेशन एजेंसी ऐक्ट, २००८’ को संसद में पारित किया. लेकिन पिछले दस वर्ष की गतिविधि ने साबित किया कि कांग्रेस सरकार ने हिंदुओं की छवि को भारत तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खराब करने के लिए, जनता के मन में इस विचार को ठूंस कर भरने के आशय से एन.आई.ए. की स्थापना की थी कि हिंदू भी इस्लाम धर्म के नाम पर होने वाले आतंकवाद जैसी टेररिस्ट ऐक्टिविटी कर सकते हैं.

जिस तरह से सी.बी.आई. जैसी जॉंच संस्था द्वारा हैंडल किए गए मामले सी.बी.आई. की कोर्ट में चलते हैं, उसी तरह से एन.आई.ए. की जांचवाले मामलों के लिए एन.आई.ए. की कोर्ट है, यह आप जानते हैं. हैदराबाद की ऐसी ही एन.आई.ए. की कोर्ट में २०१८ में वैलेंटाइंस डे के दिन हैदराबाद मक्का मस्जिद बम विस्फोट के केस में स्वामी असीमानंदजी को जब बेकुसूर घोषित किया गया तब मैं वहां मौजूद था यह भी आप जानते हैं. यही पर सब कुछ विस्तार से लिख चुका हूँ. स्वामी असीमानंदजी की तरह ही साध्वी प्रज्ञा को भी लक्ष्य बनाया गया था. कांग्रेस की सरकार ने और सोनिया गांधी के इशारे पर दिग्विजय सिंह, शिवराज पाटील तथा पी. चिदंबरम ने किस तरह से देश की सिस्टम को तोड मरोड कर ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसी हवा में पैदा हुई कल्पना को साबित करने के लिए पूरे एक दशक तक भारतीय जनता की आंखों में धूल झोंकी और कांगे्रेस के इन प्रयासों में सेकुलर मीडिया और वामपंथी बदमाशों ने किस तरह से कांग्रेस का साथ दिया, उस पर से परदा उठाने का ये सही समय है.

आपको याद हो तो दो – महीने पहले इसी कॉलम में कई बार मैने इस बारे में संकेत किया था. उस समय ऑलरेडी मेरे हाथ में इसमें से काफी सारी जानकारी थी लेकिन कुछ बातों को अभी कोरोबोरेट करना शेष था. वैसे समझौता ट्रेन ब्लास्ट मामले का फैसला किसी भी क्षमण आ जाएगा, यह तो तय था और हैदराबाद मक्का मस्जिद वाले बनावटी मामले में असीमानंदजी जिस प्रकार से निर्दोष छूट गए, उसी तरह से इइ केस में भी उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है, वह बिलकुल स्पष्ट था. पिछले सप्ताह आखिरकार मामले पर फैसला आ ही गया. उसी तरह से आम चुनाव के प्रचार में हर दिन कांग्रेस के बाल-बच्चे धोती-साडी पहनकर, मंदिर- मंदिर दर्शन करके हिंदुओं को उल्लू बना रहे हैं कि भाजपा को क्या पता कि हिंदुत्व क्या है, उनसे पूछिए कि असली हिंदुत्व किसे कहते हैं, मोदी को नहीं- यह बात वे सार्वजनिक रूप से बोल चुके हैं- इसीलिए ये हमारा कर्तव्य है कि इन राक्षसों ने हिदू संस्कृति को कलंकित करने के लिए हवन में कैसी कैसी हड्डियां और कैसे पूरे के पूरे कंकाल डाले हैं, इसका हिसाब किताब हमें समझ लेना चाहिए.

१९ दिसंबर २०१८. होटल ताज की २३वीं मंजिल पर एक बैंक्वेट हॉल में एक मराठी पुस्तक का लोकार्पण हो रहा है. पुस्तक का नाम है ‘हिंदू दहशतवाद नावाचे थोतांड’. लेखक: आर.वी.एस. मणि और अनुवादक: अरुण करमरकर. पुस्तक के प्रकाशक परम मित्र पब्लिकेशन्स जिसके मालिक माधव जोशी मेरे व्यावसायिक मित्र हैं. पुस्तक के मूल लेखक मणिसाहब भी इस भव्य समारोह में उपस्थित थे. २०१८ के आरंभिक महीनों में उन्होंने अंग्रेजी में ‘द मिथ ऑफ हिंदू टेरर: इनसाइडर अकाउंट ऑफ मिनिस्ट्री ऑॅफ हो अफेयर्स-२००६- २०१०’ नाम से जो किताब लिखी उसकी पहली आवृत्ति प्रकाशित होते ही सारे देश में तहलका मच गया. दूसरी आवृत्ति भी तुरंत प्रकाशित हुई. मराठी में भी अनुवाद हुआ. आर.वी.एस. मणि गृह विभाग में अधिकारी थे और २००६ से २०१० के बीच उन्होंने होम मिनिस्ट्री में इंटरनल सिक्योरिटी डिविजन में कर्तव्य निभाया था. उन्होंने खुले आरप (और प्रमाणों सहित) लिखा है कि शिवराज पाटील, पी. चिदंबरम, तथा दिग्विजय सिंह के अलावा अब्दुल रहमान अंतुले तथा चित्कला जुत्शी, धर्मेंद्र शर्मा, हेमंत करकरे, (हां, वही) और आर.वी. राज जैसे लोग भी ‘हिंदू आतंकवाद’ का बनावटी माहौल खडा करने में सक्रिय थे. किस तरह से, इसकी चौंकानेवाली जानकारियॉं हम देखेंगे.

सेकुलर मीडिया ने इन विवरणों को बिलकुल नजरअंदाज कर दिया, जो कि स्वाभाविक है. लेकिन आप देखिए कि जिस जिसका भी नाम लिखा है उसमें से किसी ने भी ऐसा नहीं कहा है कि आर.वी. मणि के आक्षेप गलत हैं, और न ही उन्होंने अपना बचाव किया है. अभी तक उनमें से किसी भी कांग्रेसी नेता या उनके पिट्ठुओं ने मानहानि का दावा नहीं किया है, साधारण शिकायत भी नहीं की है.

लेकिन मणिसर जब होम मिनिस्ट्री के आंतरिक सुरक्षा विभाग में कर्तव्य निभा रहे थे तब उन्हें परेशान करने में कांग्रेस ने तथा कांग्रेसी नेताओं की चमचागिरी करके अपना करियर बनानेवाले ब्यूरोक्रेट्स ने कुछ बाकी नहीं रखा. अजमल कसाब जब पकडा गया तब आतंकवादियों के ‘भारतीय’ मित्रों ने मणिसर का अपहरण करके उन्हें बंधक बनाकर बदले में कसाब को छुडाने (वह अपना मुंह खोले इससे पहले) का प्लान बनाया था और उसे अमल में भी लाया था, लेकिन मणिसर की सावधानी के कारण वे बाल बाल बच गए. गुजरात के सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में डी.जी. बंजारा को फंसाया गया. उसके बाद इशरत जहां मामले में बंजारा को जब डाला गया तब पी. चिदंबरम ने मणिसर से गृह विभाग की ओर से कोर्ट में शपथपत्र प्रस्तुत कराया था. बंजारा और उनके सभी पुलिस के साथी इन दोनों मामलों से निर्दोष साबित हुए लेकिन उन्हें वर्षों तक जेल में यातना भोगनी पडी, जिसका कारण कांग्रेस की हिंदुओं के प्रति ईर्ष्या. सोहराबुद्दीन केस में तो उस समय के गृहमंत्री और आज के भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह को भी कांग्रेस ने सीबीआई का गलत केस खडा करके साबरमती जेल में डाल दिया था. अमित शाह गृहमंत्री के अलावा जेल मंत्री भी थे. वे महीनों तक खुद जिस जेल विभाग के मंत्री थे उसी जेल में उन्हें रहना और यातनाएं झेलनी पडी थीं. कांग्रेस ने अपने मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए हिंदुओं को आतंकवादी के रूप में स्थापित करने का जो षड्यंत्र रचा उसका फूलप्रूफ अकाउंट अब हमारे पास है. यही समय है कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील ठोंकने का.

कल से हथौडे मारना शुरू.

आज का विचार

ना मैं केरल आया हूँ, ना मुझे केरल ने बुलाया है…..अमेठी से स्मृति इरानी ने मुझे भगाया है!

-व्हॉट्सएप पर पढा हुआ

एक मिनट!

बका: पका, तुझे याद है, कांग्रेस की जब २१६ सीटें थी तब वे कहते थे कि रामसेतु काल्पनिक है.

पका: हां, और ४४ पर आ गए तो मंदिर मंदिर जाकर पूजा करने लगे.

बका: तू लिख लेना, जब भारत के वोटर्स उन्हें ४ सीट पर ले आएंगे तब वे चिल्ला चिल्ला कर कहेंगे: मंदिर वहीं बनाएंगे!

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