गुड मॉर्निंग- सौरभ शाह
(मुंबई समाचार, मंगलवार – ४ दिसंबर २०१८)
क्या आपने कभी ध्यान दिया कि कॉटन या सूती शर्ट खरीदने के लिए जब आप बाजार जाते हैं तो अच्छी खासी महंगी ब्रांड की कई शर्ट्स कॉटन की होने के बावजूद उनमें कॉटन जैसा फील नहीं आता? इसका कारण है. अमेरिका ने कपड़ा उत्पादकों को छूट दी है कि जिस कपड़े में ९० प्रतिशत कॉटन हो उसे ब्लेंडेड कपड़ा नहीं बल्कि कॉटन के रूप में ही पहचाना जाएगा. कॉटन मिलों के उत्पादकों द्वारा लॉबिंग करके सरकार से नियम बनवाने का ये नतीजा है.
अमेरिका में आप ऑर्गेनिक फूड लेने जाएंगे तो यह जरूरी नहीं है कि वह पूरी तरह से प्राकृतिक खाद से उगाए गए अन्न/ सब्जियों से ही बना फूड होगा. ऑर्गेनिक फार्मिंग के नाम पर बडी कीमत लेनेवाले धनवान किसानों की लॉबी ने वहां की सरकार से दस प्रकार के फर्टीलाइजर्स/ पेस्टिसाइड्स को मंजूर करवा लिया है ताकि वे ऑर्गेनिक खेती में उसका उपयोग करके `ऑर्गेनिक’ का लेबल लगाकर अमेरिकी ग्राहकों को लूट सकें. काटनवाला तो भारत में भी आ गया है, और अगर सरकार सचेत नहीं रही तो ऑर्गेनिक वाला भी देर सबेर आ ही जाएगा.
शब्दों का वही लेबल बरकरार रखकर उसके अर्थ में गडबड घोटाला करने का चलन खतरनाक है. जिसका दिमाग ठिकाने पर नहीं है उसे मेंटली चैलेंज्ड कहने से या बहरा- अंधा- गूंगा या अपंग के लिए ऐसी यूफेमिस्टिक टर्म्स का उपयोग करके संबोधित करने से उनकी कमी दूर नहीं होनेवाली. फिर भी, इन सबके लि अलंकारिक विशेषणों का उपयोग करना ठीक है. लेकिन इसके विपरीत मेडिकल फील्ड वाले शुगर में थोडी सी भी कमी-अधिकता वाले मनुष्य को डायबिटीज का लेबल चिपकाने में जरा भी संकोच नहीं करते, क्योंकि डायबिटीज का हौवा खडा करके फार्मा इंडस्ट्री तथा उनके दलाल समान डॉक्टर अरबों रूपए की कमाई करते हैं. कोलेस्टरॉल के पीछ छिपा घोटाला हाल ही में सामने आया है जिसकी खबर आपको शायद ही किसी मीडियावाले ने दी हो. उसकी बात करते हैं.
अमेरिका की शुगर लॉबी काफी विशाल है. चाय में डलने वाली शक्कर के उपयोग इसके अलावा भी सैकडों हैं. लंबी शेल्फ लाइफ वाली हर चीज में शक्कर डालनी पडती है. टमाटर सॉस जैसी हजारों वस्तुओं के अलावा चॉकलेट, पिपरमिंट, शीत पेय इत्यादि में टनों शक्कर की खपत होती है. शक्कर की अधिकता से हार्ट की बीमारी उभरती है, अन्य कई बीमारियों को यह आमंत्रण देती है. लेकिन अमेरिकी चालबाजों ने हार्ट की बीमारी के लिए कोलेस्टरॉल नाम का बिल फाडा. लोग डर कर बायपास, स्टेंट और न जाने क्या क्या करवाने लगे. अब जाकर ये भांडा फूटा है कि कई ट्रिलियन डॉलर की कमाई करने के बाद ये अमेरिकी आपको बता रहे हैं कि कोलेस्टरॉल से डरने जैसी कोई बात नहीं है.
हमारे आयुर्वेद ने तो हजारों साल पहले कहा है. इसीलिए घी (या तेल) को ठीक अनुपात में लेने की सिफारिश की गई है. डॉ. मनु कोठारी भी `हार्ट पेशेंट्स’ कहे जानेवाले मरीजों को सलाह दिया करते थे कि घी में चुपड़ी रोटी ही खानी चाहिए और सप्ताह में एकाध बार मिठाई का टुकडा भी थाली में लेना चाहिए. डॉ. मनु कोठारी के निधन को अभी पांच साल भी पूरे नहीं हुए हैं और जिन बातों के लिए अच्छे अच्छे डॉक्टर उनकी मजाक उडाते थे, जिन बातों के कारण उन्हें मेडिकल फील्ड में हाशिए पर डाल दिया गया था, वे सारी बातें अब साबित हो रही हैं, पश्चिम का चिकित्सा जगत प्रमाणों के साथ उन बातों को मान रहा है. कोलेस्टरॉल इसमें आई सबसे नई बात है. पश्चिम की चकाचौंध में पडे हम सभी जब तक वहां से सर्टिफिकेट नहीं आ जाता तब तक हम अपने यहां पर डॉ. मनु कोठारी जैसे ऋषियों को अपेक्षित आदर नहीं देते. वर्ना उन्हें तो जीते जी भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए था.
जो लोग संकुचित हैं, जो वामपंथी विचारधारा से जुडे हैं वे खुद को `लिबरल’ या `उदारवादी’ कहलाते हैं. जो लोग खुद हिंदू संस्कृति को सह नहीं सकते, वे खुद को `असहिष्णु’ कहने के बजाय हमें `इनटॉलरेंट’ कहते हैं. जिनकी संस्थाएं लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखतीं, जहां पदाधिकारियों का निष्पक्ष चुनाव नहीं होता वे मोदी को `तानाशाह’ कहते फिरते हैं.
अमेरिका के चक्कर में पडकर हमारे शासकों ने गत ७० वर्षों में इस देश का काफी बडा नुकसान किया है. अपनी तिजोरियां भरकर देश को दीवालिया करनेवाले शासकों को व्यापार-बैंकिंग में अमेरिका की तानाशाही के सामने झुकना पडता था. अब वैसे दिन नहीं रहे. अमेरिका, चीन या जापान हमें डराकर, हमारी नाक दबाकर जो चाहे कर सकते थे. अब वो जमाना नहीं रहा. ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी इत्यादि तो मानो हमारे स्तर के ही नहीं हैं. सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देश भी समझ गए हैं कि पाकिस्तान के साथ दोस्ती करने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम खराब होगा, जब कि भारत के साथ मित्रता करने पर भविष्य में आर्थिक के अलावा वैश्विक दर्जा भी बढेगा.
भारत की यह प्रगति जिनसे देखी नहीं जा रही है, वे वामपंथी और कांग्रेस की पाली हुई मीडिया ने हताशा में क्या शुरू किया है जानते हैं? रांची या जमशेदपुर से प्रकाशित किसी हिंदी अखबार ने अपने `सूत्रों’ के हवाले `एक्सक्लुसिव न्यूज’ दी है कि रिजर्व बैंक ने २,००० रूपए की नोट छापना बंद कर दिया है और सरकार इस तरह से फिर नोट बंदी लाने जा रही है. बेसिर पैर की खबरों को अंग्रेजी में अनूदित करके मेन स्ट्रीम मीडिया में अब फैलाया जा रहा है और उन्हें कोई बेवकूफ न समझे इसलिए रांची/ जमशेदपुर के चिरकुट पेपर का हवाला दिया जा रहा है.
बदमाश मीडिया को बाबा रामदेव जैसे क्रांतिकारी योगी के प्रति कितना क्रोध है, ये देखिए. पिछले सप्ताह हेडलाइन थी कि `रामदेव को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी की’ कई लोग केवल शीर्षक पढकर आगे बढ जाते हैं. यदि आप पढने की तकलीफ लें तो आपको पता चलेगा कि स्वामी रामदेव के बारे में झूठ फैलानेवाली किसी पुस्तक के लेखक/ प्रकाशक के खिलाफ केस करके रामदेव ने उसका वितरण रोका है. प्रकाशक ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है जिसका जवाब देने के लिए रामदेव से कहा गया है. निचली अदालत के न्यायाधीश ने तो स्वीकार किया ही है कि इस पुस्तक के लेखक ने बदमाशी की है. इसीलिए उस पर प्रतिबंध लगाया गया है. लेकिन हेडलाइन पढकर सामान्य पाठक को क्या लगा होगा? गलती रामदेव की होगी. ये न्यूज आयटम भी ऐसी गोल गोल कानूनी भाषा में लिखी गई है कि मुझ जैसे को भी बात के पीछे की सच्चाई पता होने के बावजूद तीन बार धैर्य से पढना पडा तब संतोष हुआ.
जब जोसेफ कुरियन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस थे तब खूब विवादों में रहे थे. इस बारे में मैने लिखा भी है. मेरी राय थी कि उनका बर्ताव ठीक नहीं है. उस समय विस्तार से कारण भी लिखे थे. जोसेफ कुरियन ने सुप्रीम कोर्ट के भूतपूर्व न्यायाधीश बनने के बाद दो दिन पहले सार्वजनिक रूप से क्या कहा आपको पता है? `उन्हें लग रहा था कि भूतपूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा किसी के कहने पर निर्णय दे रहे थे (ही वॉज़ रिमोट कंट्रोल्ड).’ कोई यानी मोदी सरकार ऐसा हमें समझना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट में सेवारत रहने के दौरान जोसेफ कुरियन, रंजन गोगोई के अलावा अन्य दो न्यायाधीशों ने मिलकर प्रेस कॉन्फरेंस करके बहुत ही गलत आचरण किया था. (दीपक मिश्रा की सेवानिवृत्ति के बाद रंजन गोगोई वर्तमान में चीफ जस्टिस हैं). यदि मैने जोसेफ कुरियन का इंटरव्यू लिया होता तो भूतपूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बारे में उनके गैरजिम्मेदाराना स्टेटमेंट को सुनकर उनसे पूछा होता: साहब, आप जब नौकरी पर थे तब आपने तथा आपके साथ प्रेस कॉन्फरेंस करनेवाले अन्य तीन न्यायाधीशों का बर्ताव रिमोट कंट्रोल्ड था, ऐसा हमें लग रहा था तो क्या ये बात सच थी कि आप चारों लेफ्टिस्ट मीडिया और कांग्रेसी (वकील चिदंबरम, सिब्बल, सिंघवी) के हाथों का खिलौना थे?
ऐसे सवालों का जवाब जोसेफ कुरियन ने क्या दिया होता?
आज का विचार
बताना चाहते हैं तुम्हें कि अजब है वातावरण,
एक पल तुम होती हो तो एक पल तुम्हारा स्मरण.
राजेंद्र शुक्ल
एक मिनट!
नरेंद्र मोदी: स्वर्ण पदक जीतने के लिए मैरी कॉम को बधाई. उनकी यह सफलता सभी के लिए प्रेरणादायी है….
राहुल गांधी: ये देखिए, भाइयो. हमारे प्रधानमंत्रीजी मेडल जीतने वालों को बधाई देने की जगह अपनी `कौम’ को बधाई दे रहे हैं… हमारे प्रधान मंत्री `कौमवादी’ हैं….








